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रविवार

टेलीविजन की ताकत और कमजोरी (Strengths and weaknesses of television)

Dr Awadhesh K. Yadav (Assistant Professor)     अक्टूबर 12, 2025    

 टेलीविजन की मदद से किसी भी घटना से जुड़ी तस्वीरों को न केवल आंखों से देखा जा सकता है, बल्कि उससे जुड़ी जानकारियों को कानों से सुना भी जा सकता है। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि आंखों से देखी गई घटनाएं मानव को अधिक समय तक याद रहती हैं तथा उनका प्रभाव भी जीवन पर काफी अधिक पड़ता है। यह टेलीविजन की निम्नलिखित ताकतों के कारण ही संभव होता है। 

1. दृश्य-श्रव्य माध्यम: टेलीविजन संचार का दृश्य-श्रव्य माध्यम है, क्योंकि इसकी सहायता से हम मात्र सूचना/जानकारी को प्राप्त ही नहीं कर सकते हैं, अपितु उन्हें देख और सुन भी सकते हैं। अतः यह संचार का ऐसा माध्यम है जो दृश्यों और ध्वनियों को सम्मिश्रित कर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।

2. दर्शकों की विविधता: टेलीविजन भिन्न-भिन्न प्रकृति के लोगों की आवश्यकताओं की पूर्ति करता है, जो न केवल भौगोलिक दृष्टि से अलग-अलग होते हैं, बल्कि शैक्षणिक, रुचि, अनुभव, सामाजिक, आर्थिक, लिंग, धर्म, समुदाय, संस्कृति आदि के आधार पर भी विविधता होती है।

3. प्रसारण की गति: रेडियो की तुलना में टेलीविजन के माध्यम से भेजी जाने वाली सूचना अपेक्षाकृत धीमी गति से पहुँचती है, क्योंकि तकनीकी जटिलताओं व बाध्यताओं के कारण विभिन्न घटनाओं में समय लगता है, किन्तु अपने दर्शकों के पास लगभग एक ही समय में पहुंचती हैं।

4. आर्थिक पक्ष: टेलीविजन संचार का सस्ता माध्यम है, जिसके चलते कम आय के लोग भी आसानी से खरीद लेते हैं। बाजार में प्रतिस्पर्धा के चलते आसान किश्तों में टेलीविजन उपलब्ध है, जिसके चलते जन-सामान्य तक इसकी पहुंच हो गई है। 

5. एकाग्रता में वृद्धि: टेलीविजन कार्यक्रम देखने और समझने के लिए रेडियो की तुलना में अधिक एकाग्रचित्त होने की जरूरत पड़ती है। कहने का तात्पर्य है कि टेलीविजन पर प्रसारित कार्यक्रमों को देखते समय कोई अन्य कार्य करना संभव नहीं होता है। 

6. सरल तकनीकी: टेलीविजन सरल तकनीकी वाला संचार माध्यम है, जिसके चलते इसे आपरेट करने में अधिक तकनीकी ज्ञान की आवश्यकता नहीं होती है। तभी तो छोटे बच्चों के साथ-साथ कम पढ़े-लिखे तथा अशिक्षित व्यक्ति आसानी से इसका उपयोग कर लेते हैं। 

कमजोरी

  1. टेलीविजन के माध्यम से संचारक से प्रापक की ओर सूचना का सम्प्रेषण तो सम्भव है, परन्तु प्रापक की प्रतिक्रिया को जानना संचारक के लिए संभव नहीं है।  
  2. टेलीविजन से शिक्षा ग्रहण करने के लिए अधिक ध्यान केन्द्रित करने की आवश्यकता होती है।
  3. टेलीविजन के उपयोग के लिए बिजली तथा सूचना प्रसारण जैसी सुविधाओं का होना आवश्यक है, जो इसके उपयोग को सीमित करता है।
  4. टेलीविजन का बच्चों के शारीरिक, मानसिक, मनोवैज्ञानिक, संवेगात्मक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
  5. टेलीविजन संचार का एक तरफा माध्यम है।


शुक्रवार

टेलीविजन की विशेषताएँ (Characteristics of television)

Dr Awadhesh K. Yadav (Assistant Professor)     अक्टूबर 10, 2025    

टेलीविजन एक प्रमुख संचार माध्यम है, जो दृश्य और श्रव्य तत्वों का संयोजन करके दर्शकों के लिए सूचना, शिक्षा और मनोरंजन से सम्बन्धित कार्यक्रमों का प्रसारण करता है। इसका आविष्कार 20वीं शताब्दी के प्रारंभ में जॉन लोगी बेयर्ड ने किया। भारत में टेलीविजन का प्रसारण 1959 में प्रारंभ हुआ, जो वर्तमान समय में करोड़ों घरों में मौजूद है। टेलीविजन की विशेषताएँ इसे रेडियो, अखबार या इंटरनेट से अलग बनाती हैं। यह न केवल मनोरंजन का स्रोत है, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक परिवर्तनों का उत्प्रेरक भी है।


इसकी प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:- 

1. दृश्य-श्रव्य माध्यम: टेलीविजन की सबसे प्रमुख विशेषता इसका दृश्य-श्रव्य (ऑडियो-विजुअल) स्वरूप है। यह केवल ध्वनि या चित्र नहीं, बल्कि दोनों का जीवंत संयोजन प्रस्तुत करता है। दृश्य तत्व जैसे चित्र, रंग, गति और अभिनय दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ते हैं, जबकि श्रव्य तत्व संवाद, संगीत और ध्वनि प्रभाव गहराई प्रदान करते हैं। उदाहरणस्वरूप, एक समाचार प्रसारण में एंकर की आवाज के साथ घटनास्थल के वीडियो फुटेज दर्शक को घटना की सच्चाई का अहसास कराते हैं। मनोवैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार दृश्य-श्रव्य माध्यम स्मृति को 65 प्रतिशत तक मजबूत करता है, जबकि केवल श्रव्य माध्यम 10 प्रतिशत ही प्रभावी होता है। भारत में दूरदर्शन के धारावाहिक जैसे ‘रामायण’ और ‘महाभारत’ ने इसी विशेषता से करोड़ों दर्शकों को बांधा, जहां दृश्यों ने पौराणिक कथाओं को जीवंत कर दिया। 

2. विस्तृत पहुंच और व्यापक प्रभाव: टेलीविजन की एक और महत्वपूर्ण विशेषता इसकी विस्तृत पहुंच है। यह सैटेलाइट, केबल और डिजिटल प्रसारण के माध्यम से ग्रामीण से लेकर शहरी क्षेत्रों तक लाखों-करोड़ों दर्शकों तक पहुँचता है। भारत में दूरदर्शन के राष्ट्रीय नेटवर्क ने 1980 के दशक में पूरे देश को जोड़ा, जबकि आज एक हजार से अधिक चैनल उपलब्ध हैं। वैश्विक स्तर पर, बीबीसी या सीएनएन जैसे चैनल अंतरराष्ट्रीय घटनाओं को तुरंत प्रसारित करते हैं। यह विशेषता इसे राजनीतिक अभियानों, चुनावों और आपातकालीन सूचनाओं के लिए आदर्श बनाती है। उदाहरण के लिए 2020 के कोविड-19 महामारी के दौरान टीवी ने लॉकडाउन नियमों और स्वास्थ्य जागरूकता को घर-घर पहुँचाया। हालांकि, डिजिटल विभाजन एक चुनौती है, लेकिन जीयो और एयरटेल जैसे डीटीएच सेवाओं ने इसे कम किया है। टेलीविजन की पहुंच न केवल भौगोलिक है, बल्कि सामाजिक भी यह सभी वर्गों, जातियों और भाषाओं के लोगों को एक मंच पर लाता है, जिससे सामाजिक एकीकरण बढ़ता है।

3. कार्यक्रमों की विविधता: टेलीविजन पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों में विविधता इसे बहुमुखी बनाता है। समाचार चैनल ताजा अपडेट देते हैं, मनोरंजन चैनल धारावाहिक और रियलिटी शो प्रसारित करते हैं, जबकि खेल चैनल लाइव मैच दिखाते हैं। शैक्षिक कार्यक्रम जैसे डिशक्वरी चैनल के वृत्तचित्र या इग्नू के दूरस्थ शिक्षा प्रसारण ज्ञानवर्धक होते हैं। भारत में क्षेत्रीय भाषाओं के चैनल स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देते हैं। ओटीटी प्लेटफॉर्म्स ने टीवी को स्ट्रीमिंग के साथ एकीकृत कर दिया है, जहाँ दर्शक अपनी पसंद का कंटेंट चुन सकते हैं। यह विविधता दर्शकों की उम्र, रुचि और पृष्ठभूमि के अनुसार अनुकूलित होती है, लेकिन कभी-कभी सनसनीखेज सामग्री नकारात्मक प्रभाव भी डालती है। फिर भी, यह विशेषता टीवी को परिवारिक मनोरंजन का केंद्र बनाती है।

4. तात्कालिकता और लाइव प्रसारण: टेलीविजन की तात्कालिकता इसे अन्य माध्यमों से श्रेष्ठ बनाती है। लाइव प्रसारण के माध्यम से घटनाएँ वास्तविक समय में दिखाई जाती हैं, जैसे ओलंपिक खेल या संसद सत्र। 1969 के मून लैंडिंग प्रसारण ने दुनिया को एक साथ जोड़ा। भारत में 1990 के दशक में क्रिकेट विश्व कप के लाइव मैचों ने टीवी क्रांति ला दी। तकनीकी रूप से, 5जी और फाइबर ऑप्टिक्स ने लाइव स्ट्रीमिंग को बिना बफरिंग के संभव बनाया है। यह विशेषता आपदा प्रबंधन में उपयोगी है, जैसे 2004 के सुनामी या 2013 के उत्तराखंड बाढ़ में राहत सूचनाएँ। हालांकि, लाइव प्रसारण में त्रुटियाँ (जैसे गलत रिपोर्टिंग) तेजी से फैल सकती हैं, जिसके लिए फैक्ट-चेकिंग आवश्यक है।

5. मनोरंजन, शिक्षा और जागरूकता का संयोजन: टेलीविजन मनोरंजन को शिक्षा से जोड़ता है। कार्यक्रम जैसे सत्यमेव जयते ने सामाजिक मुद्दों (महिला सशक्तिकरण, बाल विवाह) पर जागरूकता फैलाई। शैक्षिक चैनल जैसे खान अकादमी की टीवी वर्जन बच्चों को सीखने में मदद करते हैं। विज्ञान कार्यक्रम पर्यावरण जागरूकता बढ़ाते हैं। भारत सरकार के ‘मन की बात’ जैसे कार्यक्रम नीतियों को जन-जन तक पहुँचाते हैं। यह विशेषता टीवी को ‘इन्फोटेनमेंट’ का माध्यम बनाती है, जहाँ मनोरंजन के बहाने शिक्षा दी जाती है।

6. विज्ञापन और आर्थिक महत्व: टेलीविजन विज्ञापन का शक्तिशाली माध्यम है। विज्ञापनदाता उत्पादों को दृश्य अपील से बेचते हैं, जैसे अमूल के हास्यपूर्ण ऐड। भारत में टीवी विज्ञापन उद्योग 2023 में 100 बिलियन रुपये का था। यह विशेषता ब्रांड बिल्डिंग में सहायक है, लेकिन ओवर-कमर्शियलाइजेशन दर्शकों को परेशान कर सकता है।

7. तकनीकी उन्नयन और स्मार्ट फीचर्स: आधुनिक टीवी में एलईडी और ओएलईडी स्क्रीन, स्मार्ट फीचर्स, वॉयस कंट्रोल और इंटरनेट इंटीग्रेशन हैं। 8K रिज़ॉल्यूशन और वीआर सपोर्ट भविष्य की दिशा हैं। भारत में स्मार्ट टीवी की बिक्री 2025 तक दोगुनी होने का अनुमान है। यह पोर्टेबिलिटी बढ़ाता है, क्योंकि कंटेंट मोबाइल पर भी उपलब्ध है।

8. सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव: टीवी संस्कृति को आकार देता है। ‘बिग बॉस’ जैसे शो वास्तविकता को प्रभावित करते हैं, जबकि समाचार चैनल राजनीतिक ध्रवीकरण बढ़ा सकते हैं। वैश्वीकरण से पश्चिमी संस्कृति का प्रभाव बढ़ा, लेकिन क्षेत्रीय चैनल प्रतिरोध करते हैं।

निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि टेलीविजन एक बहुमुखी माध्यम है, जो तकनीक, समाज और अर्थव्यवस्था को जोड़ता है। इसकी विशेषताएं इसे अपरिहार्य बनाती हैं। भविष्य में एआई और 6जी इसे और आधुनिक बनाएंगे।


गुरुवार

भारत में टेलीविजन का विकास (Development of television in India)

Dr Awadhesh K. Yadav (Assistant Professor)     अक्टूबर 09, 2025    

प्रारंभिक चरण

भारत में टेलीविजन प्रसारण की शुरुआत 15 सितंबर, 1959 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा वयस्कों को शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से आकाशवाणी के अधीन दूरदर्शन के नाम से हुई। इसकी स्थापना के लिए यूनेस्को द्वारा 20,000 डॉलर का अनुदान प्रदान किया गया था। दूरदर्शन के पहले निदेशक शैलेंद्र शंकर थे। प्रसारण के लिए आकाशवाणी भवन, नई दिल्ली की पांचवीं मंजिल पर एक छोटे स्टूडियो में 500 वाट का ट्रांसमीटर स्थापित किया गया, जिसके माध्यम से 20 किलोमीटर के दायरे में प्रसारण संभव था।

1960-61 में दिल्ली के स्कूली बच्चों के लिए टेलीविजन पर शैक्षिक कार्यक्रमों का प्रसारण शुरू हुआ। वयस्कों की शिक्षा और स्कूलों के लिए कार्यक्रमों को बढ़ावा देने हेतु सरकार ने सामुदायिक टेलीविजन सेट वितरित किए। इसी वर्ष पहली बार स्वतंत्रता दिवस के ध्वजारोहण का सीधा प्रसारण किया गया। अक्टूबर 1961 में फोर्ड फाउंडेशन और शिक्षा निदेशालय, दिल्ली के सहयोग से एक शिक्षणात्मक योजना शुरू की गई, जिसमें प्रति सप्ताह स्कूली बच्चों के लिए भौतिकी, रसायन विज्ञान, भूगोल, समाजशास्त्र, हिंदी, और अंग्रेजी जैसे विषयों पर 20-20 मिनट के पाठ सुबह-शाम प्रसारित होने लगे। प्रख्यात समाजशास्त्री पाल न्यूरथ ने इस योजना को टेलीविजन को शिक्षा का प्रभावी साधन बनाने वाला कदम बताया।

नियमित प्रसारण और विस्तार

15 अगस्त, 1965 को एक घंटे का नियमित प्रसारण शुरू हुआ, और उसी दिन पहला समाचार बुलेटिन प्रसारित किया गया। इससे पहले टेलीविजन प्रसारण मुख्य रूप से स्कूली शिक्षा और ग्रामीण विकास पर केंद्रित था। 26 जनवरी, 1967 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने किसानों को कृषि संबंधी नवीन तकनीकों और संसाधनों की जानकारी देने के लिए कृषि दर्शन कार्यक्रम शुरू किया। शुरुआत में यह कार्यक्रम बुधवार और शुक्रवार को 20-20 मिनट के लिए प्रसारित होता था, जिसे 15 जुलाई, 1970 से बढ़ाकर 30 मिनट कर दिया गया।

2 अक्टूबर, 1972 को बंबई में, 26 जनवरी, 1973 को श्रीनगर, और 29 सितंबर, 1973 को अमृतसर में दूरदर्शन केंद्र स्थापित किए गए। श्रीनगर और अमृतसर केंद्रों की स्थापना सरकार ने मजबूरी में की, क्योंकि इन क्षेत्रों में लाहौर और इस्लामाबाद से प्रसारित भारत विरोधी कार्यक्रमों का प्रभाव बढ़ रहा था। अगस्त 1975 में उपग्रह की मदद से आंध्र प्रदेश, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, गुजरात, बिहार, और महाराष्ट्र के 2400 गांवों में दूरदर्शन सेवा शुरू की गई।

1975 में नए केंद्रों का विस्तार हुआरू 27 अप्रैल को जालंधर, 9 अगस्त को कोलकाता, 14 अगस्त को मद्रास, और नवंबर में लखनऊ में प्रसारण शुरू हुआ। कोलकाता और लखनऊ के केंद्र अस्थायी थे। जनवरी 1976 में इन सातों केंद्रों से समाचार, खेल, नाटक, फीचर फिल्म, गीत और विज्ञापनों का प्रसारण शुरू हुआ। अप्रैल 1976 में चंद्रा कमेटी की सिफारिश पर दूरदर्शन को आकाशवाणी से अलग कर एक स्वतंत्र इकाई बनाया गया।

रंगीन प्रसारण और तकनीकी प्रगति

15 अगस्त, 1982 को एशियाई खेलों के अवसर पर दूरदर्शन ने रंगीन प्रसारण शुरू किया, जिसने दर्शकों के अनुभव को और समृद्ध किया। 19 नवंबर, 1985 को इनटेक्सट नामक टेलीटेक्स्ट सेवा शुरू की गई, जो समाचार और अन्य जानकारी त्वरित रूप से प्रदान करती थी। 23 फरवरी, 1987 को प्रभातकालीन प्रसारण सेवा शुरू हुई, जिसने सुबह के समय दर्शकों के लिए नए कार्यक्रम उपलब्ध कराए।

1993 में मेट्रो चौनल की शुरुआत हुई, और विदेशी चैनलों का आगमन हुआ। राष्ट्रीय प्रसारण सेवा को डीडी-1, डीडी-2 और डीडी-3 में विभाजित किया गया, जबकि क्षेत्रीय भाषाओं के चैनलों को डीडी-4, डीडी-5 और डीडी-6 नाम दिया गया। 1996 में आय बढ़ाने के लिए विज्ञापन प्रसारण सेवा शुरू की गई, जिसने दूरदर्शन को वाणिज्यिक रूप से और सशक्त बनाया।

समाचार चैनल और आधुनिक युग

3 नवंबर, 2003 को दूरदर्शन ने डीडी न्यूज नामक 24X7 समाचार चैनल शुरू किया, जो समाचार बुलेटिन और समसामयिक मुद्दों पर परिचर्चा प्रसारित करता है। इसके अलावा डीडी नेशनल पर भी नियमित समाचार बुलेटिन प्रसारित होते हैं। आज टेलीविजन पर समाचार चैनलों की होड़ लगी है, जहां ब्रेकिंग न्यूज, लाइव कवरेज, और सबसे तेज जैसे नये चैनलों की लोकप्रियता को बढ़ा रहे हैं।

डिजिटल युग और वर्तमान स्थिति

2000 के दशक के मध्य में डिजिटल टेलीविजन और डायरेक्ट-टू-होम (DTH) सेवाओं ने भारत में टेलीविजन के परिदृश्य को बदल दिया। 2004 में दूरदर्शन ने डीडी डायरेक्ट प्लस (अब डीडी फ्री डिश) लॉन्च किया, जो मुफ्त DTH सेवा प्रदान करता है और ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक रूप से लोकप्रिय है। इसने लाखों घरों तक मुफ्त में टेलीविजन चैनल पहुंचाए।

2010 के दशक में इंटरनेट और ओवर-द-टॉप (OTT) प्लेटफॉर्म्स के उदय ने टेलीविजन की परंपरागत अवधारणा को चुनौती दी। नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम, और हॉटस्टार जैसे प्लेटफॉर्म्स ने दर्शकों को ऑन-डिमांड सामग्री प्रदान की। इसके बावजूद, दूरदर्शन और अन्य पारंपरिक चैनल क्षेत्रीय भाषाओं और ग्रामीण दर्शकों के लिए प्रासंगिक बने रहे।

2020 तक भारत में 2000 से अधिक टेलीविजन चैनल उपलब्ध थे, जिनमें समाचार, मनोरंजन, खेल और क्षेत्रीय भाषा चैनल शामिल हैं। 2023 में दूरदर्शन ने अपनी डिजिटल उपस्थिति को मजबूत करने के लिए DD India को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और आकर्षक बनाया, जिसका उद्देश्य वैश्विक दर्शकों तक भारतीय संस्कृति और समाचार पहुंचाना है।

भविष्य की संभावनाएं

भारत में टेलीविजन का भविष्य डिजिटल और पारंपरिक प्रसारण के संयोजन में निहित है। 5G तकनीक और स्मार्ट टीवी के बढ़ते उपयोग ने इंटरैक्टिव और हाइब्रिड सामग्री की मांग को बढ़ाया है। दूरदर्शन भी अपनी सामग्री को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध कराने के लिए कदम उठा रहा है, जैसे यूट्यूब और अन्य स्ट्रीमिंग सेवाएं। साथ ही, एआई-आधारित सामग्री अनुशंसा और वर्चुअल रियलिटी (VR) जैसे नवाचार टेलीविजन के अनुभव को और समृद्ध कर रहे हैं।

आज भारत का टेलीविजन उद्योग शिक्षा, मनोरंजन और सूचना के क्षेत्र में एक शक्तिशाली माध्यम बना हुआ है, जो विविधता और नवाचार के साथ निरंतर विकसित हो रहा है।

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भारत में टेलीविजन के विकास पर आधारित अति लघु उत्तरी प्रश्न और उत्तर

  • प्रश्न: भारत में टेलीविजन प्रसारण की शुरुआत कब हुई? उत्तर: 15 सितंबर, 1959 को।
  • प्रश्न: दूरदर्शन की स्थापना का मुख्य उद्देश्य क्या था? उत्तर: वयस्कों को शिक्षा प्रदान करना।
  • प्रश्न: दूरदर्शन के पहले निदेशक कौन थे? उत्तर: शैलेंद्र शंकर।
  • प्रश्न: भारत में टेलीविजन प्रसारण के लिए पहला ट्रांसमीटर कितनी शक्ति का था? उत्तर: 500 वाट।
  • प्रश्न: दिल्ली में स्कूली बच्चों के लिए टेलीविजन कार्यक्रम कब शुरू हुए? उत्तर: 1960-61 में।
  • प्रश्न: स्वतंत्रता दिवस के ध्वजारोहण का पहला सीधा प्रसारण कब हुआ? उत्तर: 1960 में।
  • प्रश्न: फोर्ड फाउंडेशन के सहयोग से शिक्षणात्मक योजना कब शुरू हुई? उत्तर: अक्टूबर 1961 में।
  • प्रश्न: नियमित प्रसारण और समाचार बुलेटिन की शुरुआत कब हुई? उत्तर: 15 अगस्त, 1965 को।
  • प्रश्न: कृषि दर्शन कार्यक्रम की शुरुआत किसने की? उत्तर: इंदिरा गांधी।
  • प्रश्न: बंबई में दूरदर्शन केंद्र कब खोला गया? उत्तर: 2 अक्टूबर, 1972 को।
  • प्रश्न: उपग्रह के माध्यम से दूरदर्शन सेवा कब शुरू हुई? उत्तर: अगस्त 1975 में।
  • प्रश्न: दूरदर्शन को आकाशवाणी से कब अलग किया गया? उत्तर: अप्रैल 1976 में।
  • प्रश्न: रंगीन प्रसारण की शुरुआत कब हुई? उत्तर: 15 अगस्त, 1982 को।
  • प्रश्न: इनटेक्सट सेवा कब शुरू की गई? उत्तर: 19 नवंबर, 1985 को।
  • प्रश्न: डीडी न्यूज चैनल की शुरुआत कब हुई? उत्तर: 3 नवंबर, 2003 को।
  • प्रश्न: डीडी डायरेक्ट प्लस (डीडी फ्री डिश) कब लॉन्च हुआ? उत्तर: 2004 में।
  • प्रश्न: मेट्रो चैनल की शुरुआत कब हुई? उत्तर: 1993 में।
  • प्रश्न: विज्ञापन प्रसारण सेवा कब शुरू की गई? उत्तर: 1996 में।
  • प्रश्न: प्रभातकालीन प्रसारण सेवा कब शुरू हुई? उत्तर: 23 फरवरी, 1987 को।
  • प्रश्न: 2023 में दूरदर्शन ने किस चैनल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आकर्षक बनाया? उत्तर: डीडी इंडिया।

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